डॉक्टर का बिल पर ऐसा क्या लिखा था ??

एक दिन, एक गरीब लड़का जो स्कूल में पढ़ाई की फ़ीस चुकाने के लिए घर-घर जाकर सामान बेच रहा था।एक दिन वह ऐसा ही कर रहा था कि अचानक उसे तेज़ प्यास लग गयी। उसने तय किया कि वह अगले घर पर पानी मांगेगा।अगले घर से एक सुंदर युवती ने दरवाजा खोला, तो उसने कहा कि मुझे बहुत तेज़ प्यास लगी है,क्या आप मुझे पीने के लिए पानी दे सकती है।

युवती ने सोचा कि लड़के का चेहरा देख के लग रहा है कि उसे तेज़ भूख लगी है,इसलिए वह दूध का एक बड़ा गिलास ले आयी। लड़के को जैसे ही पता चला कि मैंने पानी माँगा था,यह तो दूध ले आयी।मना करने का सवाल था ही नहीं था।उसने इसे धीरे से पिया और फिर बोला, “मैं तुम्हारे इस चीज़ का बहुत एहसानमंद हूं ।मेरे पास कुछ पैसे है,वह एक गिलास की कीमत के हिसाब से नहीं है,फिर भी ले लो।”

युवती ने जवाब दिया। “माँ ने हमें सिखाया है कि एक उपकार के लिए भुगतान कभी भी स्वीकार न करों ।तुम्हारे चेहरे पर लिखा हुया था कि तुम बहुत भूखे हो,इसलिए मैंने पानी की जगह दूध ले आयी “लड़का बोला “फिर भी मैं आपको दिल से धन्यवाद देता हूं।

कुछ साल बाद में वह युवती गंभीर रूप से बीमार हो गई। स्थानीय डॉक्टर चकरा गए। उन्होंने आखिरकार उसे बड़े शहर में भेज दिया,वहाँ के मेनेजमेंट ने विशेषज्ञ डॉक्टरो को उसकी दुर्लभ बीमारी का अध्ययन करने के लिए बुलाया।जब एक डॉक्टर ने उसके शहर से आया नाम का नाम सुना, तो आश्चर्यचक़ित हो गया । तुरंत वह उठा और अस्पताल के हॉल में अपने कमरे में चला गया।

वह उसे देखने गया। उसने एक बार में उसे पहचान लिया। वह परामर्श कक्ष में वापस गया और उसने जान बचाने की पूरी कोशिश की। उस दिन से उस पर विशेष ध्यान दिया।

लंबे संघर्ष के बाद, लड़ाई जीत ली । जब युवती ने बीमारी पर आए बिल देने का अनुरोध किया।डॉक्टर ने बिल उसके कमरे में भेज दिया गया। वह बिल को खोलने से डरती रही क्योंकि उसकी बीमारी पर बहुत ख़र्च आया होगा।यदि वह उसे चुका देगी तो उसके पास कुछ भी नहीं बचेगा और शायद उसे कई लोगों से उधार भी लेना पड़े।फिर भी आख़िर अस्पताल से छुट्टी तो लेनी ही थी।बिल को पढ़ना शुरू किया जिसके अंत में कुछ ऐसा लिखा था जिसने उसका ध्यान आकर्षित किया।

उसने ये शब्द पढ़े …..

“एक गिलास दूध के साथ पूरा भुगतान किया”

(हस्ताक्षर)
डॉक्टर सुबोध

ऐसा पढ़कर युवती की आँखों में ख़ुशियों के आँसू आ गए ।वह उस युवक को याद करने लगी।

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